हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,मजलिस-ए-उलेमा व खुतबा हैदराबाद दक्कन ने एक बयान में कहा है कि इटली और कुछ यूरोपीय देशों में मुस्लिम महिलाओं के इस्लामी हिजाब और पर्दे पर लगाई गई या प्रस्तावित पाबंदियों की हम कड़ी निंदा करते हैं। हिजाब महज एक पोशाक नहीं, बल्कि मुस्लिम महिला के लिए एक धार्मिक कर्तव्य, धार्मिक पहचान और अल्लाह की आज्ञाकारिता का प्रतीक है।
मजलिस-ए-उलेमा व खुतबा हैदराबाद दक्कन ने कहा कि कुरआन मजीद में स्पष्ट रूप से फरमाया गया है:
﴿وَلْيَضْرِبْنَ بِخُمُرِهِنَّ عَلَىٰ جُيُوبِهِنَّ﴾
“और मोमिन औरतें अपनी ओढ़नियों को अपने सीने पर डाले रखें।
(सूरह नूर, 24:31)
इसी तरह अल्लाह तआला फरमाता है:
﴿يُدْنِينَ عَلَيْهِنَّ مِنْ جَلَابِيبِهِنَّ﴾
“वे अपने ऊपर अपनी चादरों के पल्लू लटका लिया करें।
(सूरह अहज़ाब, 33:59)
बयान में कहा गया कि किसी मुस्लिम महिला को केवल इस वजह से उसके धार्मिक पहनावे से वंचित करना कि वह इस्लामी हिजाब अपनाती है, धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकार के बुनियादी सिद्धांतों के संबंध में गंभीर सवाल पैदा करता है।
किसी भी समाज में स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ यही है कि व्यक्ति को अपने जायज़ धार्मिक विश्वास और धार्मिक कर्तव्यों पर अमल करने का अधिकार हो, बशर्ते वह दूसरों के अधिकारों और कानून का उल्लंघन न करे।
मजलिस ने आगे कहा कि हम यूरोपीय सरकारों से मांग करते हैं कि मुस्लिम महिलाओं की धार्मिक पहचान और हिजाब के अधिकार का सम्मान किया जाए तथा ऐसे कानूनों और कदमों से बचा जाए, जो किसी विशेष धार्मिक समुदाय को उसके धार्मिक प्रतीकों और मान्यताओं पर अमल करने से रोकें।
बयान में कहा गया कि हिजाब मुस्लिम महिला की कमजोरी नहीं, बल्कि उसके ईमान और धार्मिक अधिकार का अभिव्यक्ति है। धार्मिक स्वतंत्रता सभी के लिए होनी चाहिए, केवल बहुसंख्यकों के लिए नहीं।
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